Tuesday, March 3, 2009

Shankhnaad (शंखनाद)

This poem is written keeping in mind the General Elections in India which are going to be held in April-May 2009.

आज फ़िर वो घडी़ है आई,
युद्ध स्थल ने हुँकार लगाई;
चलो साथियों करो तैयारी,
क्योंकि अब है तुम्हारी बारी।

पाँच साल का शासन काला,
दुकानों पर लग गया ताला;
चारों ओर है मची तबाही,
बिना रीढ़ की सरकार थी आई।

टूटी सड़कें बिजली न पानी,
ऐसे ही जीते आए हम जानी;
भ्रष्टाचार से जूझती जनता,
पर करें क्या किसको चिंता?

आतंकवाद ने कहर बरसाया,
मासूमों का खून बहाया;
महंगाई बस में न समाई,
रोटी-दाल को तरसे भाई।

कुशासन का गुज़रा दौर,
आज हुई है नई भोर;
अब वो समय फ़िर है आया,
बाज़ी तुम्हारे हाथ में भाया।

जातिवाद का न हो आधार,
मतदान पर करो विचार;
बुद्धि-विवेक से तोलो तथ्य,
चुनो उसे जो बोले सत्य।

जागो रे !!!!!

-प्रत्यूष गर्ग Pratyush Garg
०३-०३-०९ 03-03-09

3 comments:

Rahul Mourya said...

Now this one is simply awesome, like a professional Poet.Keep going buddy.

Vaibhav Jain said...

arrey bhaiyya... ab chhodo blog pe poem likhna.. buk karo publish :)

ghansham das said...

mein bhi vaibhav ji se sahmat hoon bhai,
blog page par ab tum kam karo likhaai,
tumhari har kavita mein dum hai bada
kitab publish karva do isee mein hai sabki bhalai.
abhi itna hi,
shesh fir kabhi,
aapka apna hi
g d ahuja