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Friday, November 28, 2008

Koi Deewana Kehta Hai (कोई दीवाना कहता है)

This poem is written by renowned Hindi poet of our time Dr. Kumar Vishwas. I really liked it, so I decided to share with all of you. So, here it is.

कोई दीवाना कहता है,
कोई पागल समझता है ।
मगर धरती की बेचैनी को,
बस "बादल" समझता है ।
मै तुझसे दूर कैसा हू,
तू मुझसे दूर कैसी है ?
ये तेरा दिल समझता है,
ये मेरा दिल समझता है ।

मोहब्बत एक एहसासो की,
पावन सी कहानी है ।
कभी कबीरा दीवाना था,
कभी मीरा दीवानी है ।
यहा सब लोग कहते है,
मेरी आँखों मे आँसू है ।
जो तू समझे तो मोती है,
जो ना समझे तो पानी है ।

समन्दर पीर का अन्दर है लेकिन,
रो नही सकता ।
ये आँसू प्यार का मोती है,
मै इसको खो नही सकता ।
मेरी चाहत को तू अपना बना लेना,
मगर सुन ले ।
जो मेरा हो नही पाया,
वो तेरा हो नही सकता ।

भ्रमर कोई कुमुदिनी पर,
मचल बैठा तो हन्गामा ।
हमारे दिल मे कोई ख्वाब,
पल बैठा तो हन्गामा ।
अभी तक डूब के सुनते थे,
सब किस्सा मोहब्ब्त का ।
मै किस्से को हकीकत मे,
बदल बैठा तो हन्गामा ।

कोई दीवाना कहता है,
कोई पागल समझता है ।
मगर धरती की बेचैनी को,
बस "बादल" समझता है ।


- डा० कुमार विश्वास